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भूत प्रेत क्या है और इनसे बचने का उपाय


भूत प्रेत क्या है और इनसे बचने का उपाय


 दोस्तों आपने भूतों और प्रेतों के बारे में तो सुना ही होगा इनके बहुत सारे किस्से उपलब्ध हैं ? बहुत सारे लोगों ने भूतों को अलग अलग अवस्था में देखा है और बहुत सारे लोगों में भूतों का वास भी हो जाता है अगर आप भी प्रेत बाधा से परेशान है और उससे हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते है तो इस लेख को लास्ट तक पढ़ते रहें क्योंकि इस लेख में हम भूतों के बारे में विस्तार से बताएंगे और इनसे छुटकारा पाने का उपाय भी बताएंगे। 




भारत में ऐसे बहुत सारे प्राचीन स्थान है जहां भूतों का बसेरा है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह स्थान एकांत है प्राचीन घरों में ऐसा अकसर देखा गया है कि वहां भूत प्रेतों की आवाजें आती है और बहुत लोगों ने वहां पर भूत देखने का दावा भी किया है। आप मेहंदीपुर बालाजी मंदिर जानते है जो कि राजस्थान में स्थित एक बहुत ही प्राचीन है जहां आज भी बहुत से लोग जो भूतों से परेशान है वहां जाते है और ठीक हो जाते है ।


दोस्तों भूत एक मनुष्य की आत्मा है जब उसकी मृत्यु हो जाती है तब वह भूत बन जाता है ऐसा इसलिए हो सकता है कि वह बुरे कर्म करता हो, पाप करता हो या उसके परिवार वाले उसका अंतिम संस्कार ढंग से न करें तब वह मनुष्य मृत्यु के पश्चात भूत बन जाता है। भूत प्रेत योनि बहुत ही दर्दनाक होती है इसमें प्रेत किसी भी प्रकार से सुखी नहीं होते है। 



तीन प्रकार कि आत्मा : – प्रेत आत्मा, जीव आत्मा और सूक्ष्म आत्मा। शास्त्रों के अनुसार यह तीन प्रकार की आत्माएं होती है जब एक आत्मा वासना से युक्त शरीर में जाती है तो उसे प्रेतात्मा कहते है और जब एक आत्मा किसी जीव के शरीर में जाती है अथार्थ मनुष्य, चींटी, हाथी, भालू आदि तो उसे जीवात्मा कहते है और जब एक आत्मा किसी सूक्ष्म शरीर में निवास करती है (वायरस, बैक्टीरिया आदि) तो उसे सूक्ष्मात्मा कहते है यह तीन प्रकार की आत्मा होती है



मरने के बाद भूत बनने की प्रक्रिया


दोस्तों वैसे तो अगर कोई भला व्यक्ति मरता है तो उसकी आत्मा जन्म मरण के बंधन काटकर उस सच्चिदानंद परमेश्वर को प्राप्त हो जाती है लेकिन अगर कोई ऐसा व्यक्ति जो कामना या वासना में बंधा हुआ व्यक्ति है उसकी हत्या हो जाती है या किसी भी प्रकार से उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसकी आत्मा उस निराकार परमेश्वर को न प्राप्त होकर इस पृथ्वी पर ही रह जाती है और लोगों को परेशान करती है और अगर किसी के मृत माता पिता या उसके पितृ का अगर कोई श्राद्ध न करे तो वह भी उसके तृप्त न हुए पितृ द्वारा परेशान होते है इसलिए श्राद्ध जरूर करें । 


आध्यात्मिक किताबों के अनुसार आत्मा के तीन शरीर होते है पहला स्थूल, दूसरा सूक्ष्म और तीसरा कारण शरीर यह तीन आत्मा के शरीर माने गए है प्रकृति के अनुसार आत्मा का स्थूल शरीर 120 से 130 साल तक होता है और सूक्ष्म शरीर की उम्र करोड़ों साल तक है और आत्मा का जो कारण शरीर है वह अमर होता है और यह वायु रूप में हमेशा पृथ्वी पर निवास करती है।


दोस्तों स्थूल शरीर जो की आत्मा की सबसे पहली अवस्था है उसे आयुर्वेद और योग के माध्यम से 150 से 170 साल तक जीवित रखा जा सकता है और सूक्ष्म शरीर करोड़ों वर्ष तक जिंदा रहती है। 

भूत का वास किस पर होता है 


बुरे कर्म करने वाले व्यक्ति : सभी धर्मों के अनुसार जो लोग तिथि (एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या आदि) को नहीं मानते है ईश्वर का अपमान करते है देवताओं का अपमान करते है गुरु को बुरा भला कहते है हमेशा अनेक प्रकार के गलत कर्म करते है शराब और मांस आदि खाते पीते है भूत प्रेत उनके जैसे लोगों को ही ढूंढ़ते है और यह लोग बहुत जल्दी भूतों के वस में आ जाते है। 


भावुक लोगो पर होता है भूतों का शासन : जो लोग भूतों के बारे में अधिक सोचते है उनकी डरावनी फिल्म देखते है। जो व्यक्ति ज्यादा भावुक किस्म का है और जिन लोगों की मानसिक शक्ति कम होती है ऐसे लोगों पर भूतों का वास जल्दी हो सकता है ऐसे लोगों के उप्पर भूत प्रेत आकर राज करते है ।


जो लोग रात को अनुष्ठान या कोई कर्म करते है : दोस्तों हिन्दू सनातन धर्म के अनुसार किसी भी धार्मिक कार्य को रात को नहीं करना चाहिए यह गलत माना गया है जो लोग रात को कोई अनुष्ठान या कोई कार्य करते है वह अच्छा या बुरा ही सकता है (भूत को वस में करना, गलत सिद्धियां करना) वह लोग भूत, प्रेत और पिशाच बनते है । 


ज्योतिष के अनुसार : राहु के कुंडली में होने पर भी ऐसा हो जाता है जब राहु लग्न या अष्टम प्रभाव में होता है तो उसकी सभी ग्रहों पर दृष्टि होती है तो ऐसी स्तिथि में ज्ञानी व्यक्ति को एहसास होने लगता है कि उसपर भूतों का साया है तांत्रिक या जो राक्षस गण के होते है उन्हें तुरंत ही पता चल जाता है कि उनके उप्पर भूत प्रेत का साया है । 


कैसे पता करें कि भूत पीछे पड़ा है : दोस्तों भूत अगर किसी पर है तो उसके क्रिया या कर्म से पता चल जाता है कि उसपर किस प्रकार के भूत का साया है जैसे : भूत पीड़ा, पिशाच पीड़ा, प्रेत पीड़ा, शकीनी पीड़ा, चुड़ैल पीड़ा, यक्ष पीड़ा, ब्रह्म राक्षस पीड़ा, डाकिनी पीड़ा दोस्तों यह सभी अलग अलग भूतों द्वारा दिए गए मानव को कष्ट है जिनके बारे में एक एक करके हम आपको बताने वाले है। 


भूत पीड़ा : दोस्तों भूत पीड़ा होने पर व्यक्ति की आंखे लाल होने लगती है शरीर में दर्द बना रहता है और अगर उसे गुस्सा आ जाए तो वह एक साथ बहुत लोगों को गिरा सकता है और अगर मूड अच्छा हो तो वह अच्छी बातें भी करता है । 


पिशाच पीड़ा : पिशाच गंदे होते है उसी प्रकार जो इनसे प्रभावित होता है वह भी हमेशा गंदे कर्म ही करता है जैसे : नाले का पानी पीना, अकेले रहना, खराब खाना खाना, गाली देना, नहीं नहाना, नग्न हो जाना इस प्रकार के गलत कार्य पिशाच से प्रभावित व्यक्ति करता है । 


प्रेत पीड़ा : दोस्तों जो व्यक्ति प्रेत से पीड़ित होता है वह हमेशा गुस्सा होता है वह चिल्लाता है इधर से उधर भागता है किसी पर विश्वास नहीं करता है उसे भूख नहीं लगता है वह हर समय नकारात्मक सोचता है अपने लिए बुरा सोचता है दूसरों को बुरा कहता है। 


शाकिनी पीड़ा : शाकिनी की पीड़ा से ज्यादातर पीड़ित महिलाएं ही रहती है इससे पीड़ित महिलाएं हमेशा दुखी ही रहती है उनके पूरे शरीर में हमेशा दर्द ही बना रहता है पीड़ित महिला की आंखे हमेशा दर्द ही करती रहती है वह अक्सर कांपती रहती है ऐसी महिलाओं में यह भी देखा गया है कि वह बीच बीच में बेहोश भी हो जाती है रोना, चिल्लाना इसमें मामूली है शाकिनी पीड़ित महिलाओं को बहुत ही परेशान करती है । 


चुड़ैल पीड़ा : चुड़ैल पीड़ा भी अक्सर स्त्रियों को ही होती है इसमें स्त्री का मांसाहारी हो जाना । कम बोलना, हमेशा मुस्कुराते रहना । धोका देना ऐसी स्त्रियों की खास बात है। 


यक्ष द्वारा पीड़ित : यक्ष द्वारा पीड़ित व्यक्ति की आवाजें धीमी हो जाती है उसके गति में तेजी आ जाती है वह तेज चलने लगता है उसकी पसंद लाल रंग हो जाती है वह अक्सर आंखो से इशारा करने लगता है । उसकी आंखो में परिवर्तन आ जाता है उसकी आंख तांबे कलर की और आंख गोल हो जाती है यह यक्ष द्वारा पीड़ित व्यक्ति की निशानी है। 


ब्रह्मराक्षस पीड़ा : दोस्तों ब्रह्म राक्षस से पीड़ित व्यक्ति  बहुत ही शक्तिशाली हो जाता है वह किसी भी प्रकार का कार्य आसानी से कर सकता है वह हमेशा अनुशासन में ही रहता है उसका मकसद किसी को भी परेशान नहीं करना होता है वह अपने ही मस्ती में मस्त रहता है और यह अधिक खाना खाते है और एक स्थान पर घंटों बैठे रहते है दोस्तों वैसे तो इन्हे शरीर से निकालना बहुत कठिन होता है दोस्तों ऐसे ही बहुत प्रकार के भूत हमारे आसपास है जिनका लक्षण और लक्ष्य अलग अलग अलग होता है।


भूतों के प्रकार : जैसा कि मैंने आपको बताया कि इंसान मृत्यु के पश्चात ही भूत बनता है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष तो इसी प्रकार से दो प्रकार के भूत होते है । 


स्त्री भूत : दोस्तों जब कोई स्त्री, नवयुवती या पशुता की मौत हो जाती है तो वह चुड़ैल बन जाती है अगर वह कुंवारी है तो वह देवी होती है । अगर मरने वाली स्त्री बुरे कर्म करती थी तो वह डायन कहलाती है तो इस प्रकार से इनका जन्म बुरे कर्मो, पापों, अकाल मृत्यु या श्राद्ध न होने से होता है । 



भूत प्रेत अपनी शक्ति से क्या क्या कर सकते है :


भूत बहुत ही शक्तिशाली होते है और इनकी गति भी बहुत तेज होती है कहा जाता है कि ये अपने मन की गति से चलते है भूत प्रेत बनने के बाद ये बहुत ही शक्तिशाली हो जाते है बहुत से भूत इंसान को छू सकते है और बहुत से नहीं छु सकते है ये उनके कर्म से निर्धारित किया जाता है भूतों को शुद्ध पानी नहीं पीने दिया जाता है ये सिर्फ गंदा पानी ही पी सकते है। ये बहुत ही प्रकार के होते है इनकी बहुत सी जातियां होती है भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व, बैताल आदि इनकी प्रजातियां होती है। बहुत से लोगों को मृत्यु के पश्चात फिर से गर्भधारण से मानव रूप प्राप्त हो जाता है । 


भूतों कि शक्तियां : दोस्तों भूत अदृश्य होते है इन्हे आंखो द्वारा नहीं देखा जा सकता है हा देख सकते है जब वे चाहे तो या किसी के पास अलौकिक शक्तियां हों तो वह भूतों को देख सकता है यह धुएं से बने होते है इनके पास शरीर नहीं होता है मनुष्य का शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना होता है पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जबकि भूतों का शरीर अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर ही बना होता है जैसा की आगे मैंने आपको बताया कि कुछ भूत मनुष्य को छू सकते है और कुछ नहीं लेकिन जो छु सकते है वह बहुत ही शक्तिशाली होते है वह बड़े से बड़े घरों को आसानी से तोड़ सकते है। 



जो भूत इंसानों को स्पर्श कर सकते है उनकी शक्तियां इतनी बलशाली होती है कि वह मनुष्य को अपने बस में करके उससे अपना कार्य करवा सकते है शरीर में जल, मांस और हड्डियां न होने के कारण अगर इन्हे तलवार, गोली या किसी भी प्रकार के मानवीय अस्त्र से मारने कि कोशिश की जाए तो उन्हें इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि इनका शरीर वायुरूप है बस ये सुख और सुख का अनुभव कर सकते है। 



बुरी और अच्छी आत्मा की परख : जो आत्माएं बुरी होती है वह प्रेत आत्मा कहलाती है और जो आत्माएं अच्छी होती है वह पृत आत्मा कहते है जो आत्माएं अच्छी होती है वह अच्छे विचारधारा वाले व्यक्ति या औरत का संघ करके खुद को तृप्त कर लेती है और उसे भी तृप्त कर देती है और जो बुरी आत्माएं होती है वह कुकर्मी, वासनापूर्ण, पापी व्यक्ति या औरत को चुनती है और उससे तृप्त होकर उसे घोर बुराइयों की और ले जाती हैं। इसलिए मानव जाति को इनसे बचने के लिए निरंतर सच्चिदानंद ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए अच्छे कर्म करना चाहिए और किसी भी बुरे व्यक्ति का संगत नहीं लेना चाहिए और हमेशा शुद्ध रहना चाहिए । 


84 लाख योनियां : दोस्तों इस पृथ्वी में जीवों कि 84 लाख योनियां है और ये योनियां इस प्रकार से है कुत्ता बिल्ली, पक्षी, गाय इस प्रकार से कीत पतंगे, जीव, जंतु, वृक्ष मिलाकर 84 लाख योनियों का निर्माण होता है । इनकी मृत्यु होने के बाद इनकी आत्मा बाहर निकल जाती है और फिर वह जन्म लेती है जिसे हम योनियां कहते है । आत्मा की मृत्यु कभी नहीं होती है वह हमेशा जीवंत रहती है । 


भूत की जिंदगी : भूत प्रेत का जीवन बहुत ही कष्ट से भरा होता है इन्हे भूंख बहुत लगती है और इनको खाने को बहुत कम मिलता है ये हमेशा दुखी ही रहते है और चिल्लाते हुए रहते है इनका जीवन बहुत ही चिड़चिड़ा रहता है ये हमेशा सोचते है कि हमें कोई तृप्त करने वाला मिल जाए जो हमारा उद्धार कर दे और इसी के लिए ये घरों में और जंगलों में भटकते रहते है इनका अच्छी जगह पर जाना सख्त मना होता है ये किसी भी शुद्ध चीजों को नहीं छू सकते है ये अच्छे पानी को नहीं छू सकते है ये पवित्र नदियों का स्नान नहीं कर सकते है कर सकते है लेकिन ये सब सुविधाएं अच्छी आत्माओं को मिलती है जो पितृ आत्माएं होती है उन्हें मिलती है। बुरी आत्माओं को ये सब सुविधाएं नहीं दी जाती है। ये जहां ज्यादा शोर, उजाला या मंत्रजाप, भजन ये सब जहां होता है वहां से दूर ही रहती है इसलिए ये कृष्ण पक्ष को ज्यादा पसंद करती है अमावस्या, तेरस, चौदस को यह सक्रिय रूप में घूमते है। ये वही ज्यादा पाए जाते है जहां इनकी मृत्यु होती है या ये एकांत में रहना ज्यादा पसंद करते है । बहुत समय से खाली घरों में या हवेली में इनका बसेरा हो जाता है। 


बचने का उपाय : 


अगर आप भी भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी, गंधर्व, बेताल, ब्रह्मराक्षस, चुड़ैल, जिन्न आदि से परेशान है तो इससे आप बहुत आसानी से छुटकारा पा सकते है हमारे पूज्य गुरुदेव के द्वारा दिए गए ताबीज से आप इन सभी से मुक्ति पाकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते है ताबीज मात्र ₹251 में आपको घर बैठे प्राप्त हो जाएगी । ( WhatsApp and Call :- +917567233021)


तो इस प्रकार से दोस्तों हमने इस लेख में आपको भूतों से जुड़े सभी प्रकार के प्रश्नों का मतलब बताने की कोशिश किया है उम्मीद करता हूं हमारे द्वारा लिखा गया यह लेख आपको जरूर पसंद आया होगा और अगर पसंद आया हो तो इसे जरूर शेयर करें।